मैं बैठा हूँ अपने खेत की मेड़ पर
छोटे-2 बच्चे मेरे चारो तरफ बैठे हैं
उनको मैं कुछ मजाकिया अंदाज में पढ़ाता हूँ
और वे कुछ मजाकिया अंदाज में अपना गाना सुनाते हैं
इनके पापा और मम्मी की रोटी और पैसा कैसे गोल है यह वें खुद बताते हैं,
वे अपनी बकरी और उसके बच्चों के साथ
आम के पेड़ के पास कबड्डी खेलते हैं
इन्हें यह भी पता है कि कोरोना से बाजार बंद है,
क्योंकि उनको एक रुपये की दण्डी वाली टॉफी
नही मिलती अब
मैंने पूंछा की कोरोना क्या है?
बुधू बोला" चाचा- २ कल रात में कोरोनवा भागा जात रहा सार आसमान में टार्च जलाए"
असल मे उनका कोरोना
आसमान में टूटता तारा है
जो उनके असीम आनंद और माँ से लिपटकर सोने का बहाना है,
कोरोना किसी की मौसी है,
तो किसी के मामा,
असलमें कोरोना कुछ भी हो
लेकिन इन बच्चों के हंसी - मज़ाक की बातों
से बड़ा नही है
इनका कोरोना तो
कोई,रोये न,
बस इतना सा है
- ऋजु


