हर बात में हर हाथ में 

वक़्त से तू लूटा गया

जिस्म पिघलता सा रहा 

और दर्द से तोड़ा गया

फिर सिसकती सिसकियाँ 

तुझे बहने से रोका गया

देख तो अंजाम कैसे 

किस किस में छुपा फोड़ा गया

दर्द बहता है जिस्म से 

हर ज़ख्म में कोढ़ छोड़ा गया

जम गया सा रक्त है

सोच का कहर सख्त है

क़िस्त की ख़्वाहिशों का

रास्ता बार बार मोड़ा गया