बस दिल ही जानता है, सुनो

कैसे तन्हाईयाँ रोती है मेरी

तुम न चाहो तो न ही सुनो

हमको कहने से रोको नहीं

ये तड़पती रहीक्यूँ सिसकती रही

तुम न हमसे ये पूछा करो

बस दिल की ही बातें, सुनो

बहोत उलझी सी है गेसुएँ

रुख़ हवाओं का न मोड़ा करो

तुम न उलझो ना सुलझा करो

हमको कहने से रोको नहीं

ये बहकती रही

मुझमें उलझी रही

क्यूँ है उलझी न पूछा करो

बस दिल की ही बातें, सुनो

प्यार तुमसे किये थे चले

तेरी खमोशियों को किससे कहे

मुझको रोको नहीं

तुम अब टोको नहीं

अपनी आगोश में छुपा लो मुझे

बस दिल की ही बातें, सुनोो