ऐसा कहा जाता है कि 'हर दिन एक नया दिन होता है' लेकिन दो बच्चों की मां के लिए, 'हर रोज एक नई कहानी'।

मेरे बारे में जानने से पहले वो जो मेरे जीवन का ताना - बाना बुनती रहती है। *मेरी बेटियाँ*

मेरी बेटियों के इर्द-गिर्द ही मेरी जिंदगी बुनी जाती रही। कविता और लेखन में आरना मेरे साथ चली, और अक्सर 

अपनी कृतियों से अपने कोमल उम्र को पार कर गई। आध्य का रुझान संगीत और कला के प्रति उत्साही रहा।


बिहार की राजधानी पटना (पाटलिपुत्र) से शुरू हुई मेरी यात्रा ने जब पहला कदम बढ़ाया तो पहला पड़ाव सिलवासा, जहाँ मैंने अपनी पहली नौकरी के साथ वैशेषिक के रूप आगे बढ़ने की शुरुआत की। अब क्योंकि यात्रा शुरू हो चुकी थी तो आगे जारी रही और सिलवासा से जयपुर और फिर जालंधर और अंत में वड़ोदरा पहुंच कर शायद जीवन ने पड़ाव डाल दिया। अपने साथ कई कहानियों और यादों पुलिंदा इकट्ठा कर एक दशक लंबा सफर तय किया।


लेखन का शौक तो पिछले 20 सालों तक रहा पर इस बार नई शुरुआत थोड़ी नई और अलग थी। 

नई यात्रा की नई शुरूआत बिल्कुल नये अनुभव और नई लेखन शैली के साथ:-  

एक दबा हुआ जुनून या एक अनंत इच्छा, आप कुछ भी कह सकते हैं।  

इस नई सोच के साथ अनुभव हुआ कि मानव मन कभी भी कुछ नया शुरू करने से खुद को रोक नहीं पाता।

मानव हृदय नये विस्तार और नई चीजें सीखने से कभी नहीं कतराता है।  

ऐसा कहा जाता है कि कुछ नया शुरू करने में कभी देर नहीं होती और जब आप कुछ नया करना चाहते है तो प्रेरणा स्त्रोत भी होता और वो आपकी जरूरत भी बन जाती है। 

आज, मैं एक मां होने के अलावा एक पत्रकार, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, आर्टिस्ट और एक शिक्षक भी हूँ। एक खुली विचारधारा और स्वतंत्र व्यक्तित्व  "संवाद मीडिया हाउस" के साथ जुड़ी हूँ। एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर मैं "रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन" के साथ जुड़ी हूं, और DRUCC वडोदरा रेलवे, पश्चिमी डिवीजन से जुड़ कर यात्रियों की जरूरतों पर काम करती हूँ ।

वडोदरा में "होरस एकेडमी के नाम से एक्टिविटी स्कूल" चलती हूँ। "यंग माइंड पब्लिकेशन हाउस में चैलेंज हेड के तौर पर जुड़ी हूँ।


 मैं साहित्य और उससे जुड़ी विचारधारा का अनुसरण करती हूं, जिसका प्रतिरूप मेरे लेखन में दिखता है। मेरे विचारों और विश्वासों ने मेरी लेखन शैली को मैंने हर काव्य विधा के तौर पर विकसित करने की कोशिश की है। कविताओं, ग़ज़लों शे'र, गीत आदि पर लिखते हुए मेरी लेखन शैली और विकसित हुई।

साहित्य और लेखन के साथ मेरा जुड़ाव पिछले 20 वर्षों से है और कुछ प्रकाशन घर के साथ एंथोलॉजी पर काम भी कर चुकी हूँ। 

भगवान के आशिर्वाद और आपके स्नेह से मैं चाहूंगी मेरी यात्रा जारी रहे।


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