फिर एक उम्मीद छोड़ आया हूँ

मैं तेरे शहर में अपना घर छोड़ आया हूँ।

मैं तेरे शहर में ......


पुछो तो गुजरी हुई गलियों से

आज किस मकां से फिर मिल आया हूँ।

मैं तेरे शहर में ......


बंद दरवाजे है सुकूँ दफ़्न है सारेबेचैनी का शबब तेरे दर को बोल आया हूँ।

मैं तेरे शहर में ......


है खबर क्या तुझे शब-ए-महफ़िल मेंमैं सुलगते हुए ज़ख्म का ज़िक्र कर आया हूँ।

मैं तेरे शहर में......


आ भी जाओ सनम तेरी तुझे क्या कहूँ

तुझमें उलझा हुआ इक असर छोड़ आया हूँ।मैं तेरे शहर में.......