मैंने अपने ईश्वर को देखा नहीं है पर मैं इतना जानती हूं मेरे ईश्वर ने मुझे जन्म दिया है जीने के लिए, किसी को मारने के लिए नहीं मेरे ईश्वर ने मुझे ज़ुबान दी है खुल कर बोलने के लिए, गाली देने के लिए नहीं मेरे ईश्वर ने मुझे हाथ दिए हैं. खोल कर दान देने के लिए, जोड़ कर बैठे रहने के लिए नहीं.. मैंने अपने ईश्वर को देखा तो नहीं पर मैं इतना जानती हूं कि जिसने मुझे और मेरे जीवन को आकार दिया है उसे एक आकार में सीमित करने का मुझे अधिकार नहीं जो  मेरी रक्षा करता है उसे रक्षा के लिए मेरी ज़रूरत नहीं जो सारे ब्रहांड को चलाता है उसे अपने नाम पर चलने वाली दुकानों की ज़रूरत नहीं जो सर्व-व्यापि है उसे चारदीवारी में सजाने का मुझे अधिकार नहीं मैंने अपने ईश्वर को देखा तो नहीं पर उसे महसूस किया है, हवा के झोंके में, नदी की धार में, खिलती कली की कोमलता में, सूरज की रोशनी में, चांद की शीतलता में... मैं अपने ईश्वर से बात करती हूं.. घंटियों, अज़ानों के शोर में नहीं, शांत मन से.. मैं भी भक्ति करती हूं... नफरत फैला कर नहीं... प्रेम की बात कर के... और मैं जानती हूं कि मेरा ईश्वर मुझसे प्यार करता है... क्योंकि उसने मुझे यहां भेजा है उसके संसार की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए, उसे बर्बाद करने के लिए नहीं.. हां मैं भी धार्मिक हूं... मेरा धर्म है इंसानियत।