तू खुद की तलाश कर,

क्यूँ है हताश सवाल कर,

जो ज़िन्दगी तुझे मिली,

क्या है नसीब में ये सब के ही ?

जो 'ना' कहे तेरा ये मन...

जो 'ना' कहे तेरा ये मन,

तो कर ख़ुदा का शुक्रिया,

क्यूंकि जो दिया, उसी का दिया।

जो है ये तेरी कश्मकश,

नहीं रहेगी ये जानकर,

कि है समय का फेर ये,

जो नहीं है आज, वो भी होगा कल सही।

कुदरत भी है तुम्हे सिखाती,

हर अंधेरी रात के बाद ही आता,

रोज़ इक नया सवेरा।

है ये कर्मों का बन्धन,

रख परे तू सारे चिंतन।

सुन तू! ना हो निराश,

छोड़ना नहीं तू जीने की ये आस।


-ऋचा सोनी-