तुम्हारी अवाज़ के बीच ख़राशें दबी हुई है मेरी
इसलिए ख़ामोश हूँ
डर है मुझे,
अगर कुछ बोलूंगा तो अभी भाग पड़ेगी
अवाज़ तुम्हारी।
बहुत हल्की हो गई है ये
सरकती जाती है हलक से मेरे
जब मिलोगी तुम
ले लेना आवाज़ तुम्हारी
मेरा थोडा बोझ कम हो जाएगा
और वैसे भी
मुझ पर ख़राशें ही जचती है मेरी।