बहुत देर से चुप बैठा हूँ, दुनिया कहती हैं कुछ तो कह दो।

चलो कह दिया,

लिपट जाओ जिस्म से, तो शबाब कह दूँ,

जल जाओ निम-शब में तो, चराग़ कह दूँ।

गुल-लबो से छू लो मेरे होंठों को, तो सुरा कह दूँ।

इतना सब कुछ कह दिया, अब क्या मर जाने को कह दूँ।