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बे-सुध जिस्म


तुम अगर कभी देख लो, सियाह रात मेंमेरे बे-सुध जिस्म को बिस्तर के सिराहने।

और घंटो आँखें गढ़ाएबड़बड़ाते हुए अपने फ़ोन से।

तो समझ जाना कि,मेरी जाँ मुझसे रूठी हुई है

उस से समझाइश के साथख़ुद की मरम्मत भी जारी है।

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