सफ़ीना-ए-इश्क़ का

नाख़ुदा तुझे बना दिया

अब मर्ज़ी तेरी

ले जाए चाहे

दिल के साहिल तक

या बहर-ए-बेरुख़ी में

डुबो दे इसे


    - अभिषेक