कभी बना वो छलिया
कभी बन गया आवारा
कभी कहा कि
है मेरा नाम जोकर
पर्दे पे गिर गिर के
अभिनय से हँसाया
आँखें भी नम कर दी
आँसू अपने छुपा कर
तीन घंटे के शो जैसा
बचपन जवानी बुढ़ापा
तीन पड़ावों में सिमटा
है सबके जीवन का सार
सहजता से बता गया
वो अनोखा कलाकार
कभी बताया दर्शकों को
कैसा होता है प्रेम रोग
एक लड़की गंगा
हो गई मैली कैसे
अद्भुत था ये भी प्रयोग
थे खानदानी जो रईस
थी उनकी ही तो
उम्दा फिल्म श्री420
मुकेश जी कहलाते थे
जिस अभिनेता का स्वर
रहेंगे सिने प्रेमियों के दिलों में
वो 'शोमैन' सदा अमर
- अभिषेक

