अक्सर सुना है
लोगों को ये कहते
उनका ज़माना था पुराना
पुरानी है उनकी बात
हैं इसलिए पुराने ख़यालात
जनाब, लोग पुराने नहीं होते
नए हो गए हैं बेशक़
आजकल के जज़्बात
गुज़रे दौर की
कोई शय हो या शख़्स
बेश-क़ीमती यूँ हीं नहीं होती
अतीत और अनुभव का
मिलता है उनमें अक्स
लाज़मी है कि
अपनी आदतें बदलिए
मत कीजिए तीखे तंज़
क्या इल्म भी है कि
बारहा ऐसे लफ़्ज़ों से
होता है कितना रंज
- अभिषेक


