क्या अनपढ़ हो ?
मत घबराओ
कुछ न आता हो तो
लड़ो चुनाव
है बढ़िया विकल्प
ज़रूर अपनाओ
अरे एक बार तो
किस्मत आज़माओ
गर जीत गए तो
थोड़े लड्डू बँटवाओ
सरकारी सुविधाओं का
लाभ उठाओ
हो मेहनती, कर्मठ अगर तो
कामचोर बन जाओ
ईमानदारी का चोला भी
फेंक ही आओ
है भाषा सौम्य, मधुर तो
उसे भूल जाओ
अपशब्दों, कटुवचनों की
शब्दावली बढ़ाओ
वैभव विलासितापूर्ण
जीवन बिताओ
दिखावे की ख़ातिर
दरबार लगाओ
झूठ नहीं बोलते हो तो
जल्दी सीख जाओ
जनता की उम्मीदों को
आग लगाओ
बेफ़िक्र हो कर फिर
धन संपत्ति जुटाओ
पीढ़ी दर पीढ़ी
बस, बैठ कर खाओ
- अभिषेक


