कभी कभी ख़ुदा

ग़लत इंसां पे भी

रहमत कर ही देता है

जो क़ाबिल नहीं

माँ बाप कहलाने के

उनकी भी

गोद भर देता है


घर में आए राजकुमार

तो जश्न ऐसा, जैसे त्योहार

गूंजी जो लक्ष्मी की किलकारी

मारने, तजने की होती तैयारी


बुरी नहीं है

बेटों की हसरत, लेकिन

क्यूँ बेटियों से

है बेइंतिहा नफ़रत


दरिंदे ज़ालिम कुछ

पत्थर दिल वाले होते हैं

जो नन्हीं परियों को 

रोने से पहले ही

चुप कर देते हैं


दुनिया में ले आए भी तो

इस कदर सितम ढाया

कैद में ही रक्खा हरदम

न पढ़ना लिखना सिखाया

मिले तन ढकने को

चीर के कुछ टुकड़े

चारो पहर की आया बनाया

थक कर बदन चूर हुआ

पर आराम का सुख न पाया

जवां होते ही बोझ हुई

बेमेल संग गठबंधन कराया

बनी जिनकी जीवन संगिनी

उनके लिए भी बस एक काया

जब तक चाहा, जी बहलाया

तन की ज़रूरत पूरी की

हवस का सामान बनाया

पत्नी का दर्ज़ा क्या मिलता

किसी ने नहीं अपनाया

जिस आंगन ब्याह कर आयी

वहीं पर हमें जिंदा जलाया


         - अभिषेक