दिल में सौ हसरत

हज़ारों आरज़ू 

लाखों अरमान लिए

कोमल हथेलियों पर

महकती हिना से

रचा था दुल्हन ने

प्रियतम का नाम


था होठों पे तबस्सुम

धड़कने तेज़-मद्धम

सोच रही थी पगली

जैसे जैसे उसकी

मेंहदी रंग लाएगी

दिलबर के दिल में

चाहत की कली भी

खिलती जाएगी


साजन घर पग रखूँगी

मिलेगा लक्ष्मी सा सम्मान

मन ही मन, भरने लगी

अनगिनत सपनों की उड़ान

माँ, बाबुल, भईया की लाडली 

थी उस साजिश से अंजान

होते ही सहर, 

उसी आँगन में

ली जाएगी उसकी जान


        - अभिषेक