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दिल संभल जा ज़रा

AbhishekAbhishek April 4, 2022
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टूट गया ना तेरा भ्रम !

क्या हुई मुक़म्मल आरज़ू !

"समझेंगे, मुझको समझने वाले"

अक्सर यही कहता था तू

अरे नादाँ ! ज़रा संभल

हक़ीक़त से हो रू-ब-रू

होती है झूठे ख़्

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