आता है याद आज भी मुझे

तेरा वो मख़मली अंदाज़

हया का रंग चेहरे पर

और सुर्ख़ था तेरा लिबास

नज़रें रुकी थीं राहों पर

बेचैन थी तुम्हारी साँस

दीदार मेरा तूने किया जब

भीगी पलकों को हुआ एहसास

जैसे मुद्दतों के बाद बुझी हो

महबूब से मिलन की प्यास


           - अभिषेक

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