स्वाधीनता बस एक दिवस नहीं
ये जज़्बा है वीर सपूतों का
जो जिगर में जुनूँ सा पलता है
तब वतन ही जन्नत लगती है
जांबाज़ो को तो, बहता लहू
माथे पर तिलक सा लगता है
आज़ादी का जो गहना
माँ भारती ने है पहना
उसकी चमक नहीं खोने देंगे
चाहे प्राणों की आहुति देंगे
हमने मुद्दतों में इसको पाया है
बेशकीमती ये सरमाया है
भारत सिर्फ़ एक मुल्क नहीं
जननी है रणबांकुरों की
माटी है वतन परस्तों की
जहां बेटों की कुरबानी है
वीरांगनाओं की कहानी है
कश्मीर हमारी जान है
हिन्दुस्तान की पहचान है
"तिरंगा" आन बान शान है
अमर शहीदों का परिधान है
सुन लो दुश्मन और गद्दार
सरहद पर गूंजती ये हुंकार
रखना न कदम, तू इस पार
जब जब आंख दिखाओगे
तुम खाक में मिल जाओगे
कर लो नापाक इरादों से
चाहे तुम कोशिशें हज़ार
हैं शौर्य बल से डटे हुए
सीमा पर हिन्द के पहरेदार
सीने में मर मिटने की आग
रग-रग में लड़ने का सुरूर
आँख दिखाने का दुस्साहस
जिन्हें नहीं हरगिज़ मंज़ूर
ऐसी पराक्रमी सेना पर
है हम भारतीयों को ग़ुरूर
वन्दे मातरम् ! जय हिन्द !
- अभिषेक

