लगी हो दिलों में जब ऐसी अगन
दूरियों का एहसास, जैसे कोई चुभन
गर्म आहें बेचैन, तेज़ होती धड़कन
इक हो जाने की तड़प और लगन
हो कितना भी चाहे, बेक़रार मन
लेकिन, मिलन से पहले
है लाज़मी ये प्रयत्न....
"रहे सुरक्षित, साथी और आपका तन"
हँसता मुस्कुराता, फिर होगा जीवन
- अभिषेक

