तू आवाज़ लगाना में तपती धूप में दौड़ी चली आऊंगीतू कभी धूप में आया,में तेरे लिए छांव बन जाऊंगीतू जो हुआ कभी उदासमें तेरे होठों की मुस्कान बन जाऊंगीज़िंदगी के इस सफर में चलना साथ मेरेमें तेरे साथ ज़िंदगी बिताऊँगी
तू आवाज़ लगाना में तपती धूप में दौड़ी चली आऊंगीतू कभी धूप में आया,में तेरे लिए छांव बन जाऊंगी
तू जो हुआ कभी उदासमें तेरे होठों की मुस्कान बन जाऊंगी
ज़िंदगी के इस सफर में चलना साथ मेरेमें तेरे साथ ज़िंदगी बिताऊँगी