समंदर को पता है 

कहां है रूकना 

कहां पर उफनना

उस नदी की विकलता

उसके बचपन की चंचलता

समंदर को पता है

कब अधीर नदी विलीन करना

बादलों को दुबारा मीठा जल बांटना

कब चांद देख उफन आना

कब खामोश वापस लौट जाना

समंदर को पता है

किस कश्ती का है सहारा बनना

किस जहाज का दंभ तोड़ना

किस कचरे को तट पर पटक आना

कहां है रत्नों को संजोना

असंख्य जल जीवों को पनाह देना

और बढ़ आई बस्तियों को उजाड़ना

समंदर को पता है

कब है विष उगलना

कब अमृत है बांटना

किसे नीलकंठ करना

लक्ष्मीपति किसे बनाना

समंदर ने देखा है

श्री राम की क्रोधित भृकुटि वक्रता

रामेश्वरम की भक्ति विनम्रता

समंदर को पता है अपनी धृष्टता

और राम सेतु की सहयोगिता

समंदर को पता है

कब द्वारिका है बसाना 

कब खुद में समाहित कर जाना

समंदर को पता है 

युगों की विषमता

समय की चंचलता

समंदर है साक्षी प्राचीन सभ्यताओं का

जीवन का आधार है तो कारण है प्रलय का

खुद में समेटे कितने इतिहासों को

देखता है हंस के दंभ मानव सभ्यताओं को