हमनें माँओं को देखा अपनी पुरानी सखियों से
धीमे फुसफुसाहट भरे अंदाज़ में
अपने पहले प्रेम के बारे में
लजाती आँखों से बात करते हुए!!
मुस्कराहट चेहरे पर झिलमिला जाती
और माँएं हम जैसी दिखतीं
भाभियाँ अचानक से धूप में
कपड़े सूखाना छोड़ अम्बिया से लगे डार
देखती खड़े-खड़े आमों के बगीचे दौड़ आती
फुदकती कूदती कितने ही टिकोरा तोड़ लाती नमक-मिर्च डाल कूटती
और घण्टों चुभलाती वह हँसती हैं,
और चटपटे बचपन से जीवन का स्वाद चखा आती हैं
प्रेम के रंग से सराबोर बहनें ढूंढती हैं अक्सर अहसासों के रेशे,
खुद से काढ़े उन रंगीन रुमालों में जो काढ़े गए थे
किसी और के लिए मगर इस्तेमाल कोई और कर रहा है
एक धोखा या एक कायरता
धूमिल कर जाती उनकी हँसी और हमारी हिम्मत जब रात के
सन्नाटों और अंधेरों से कोई सफ़ेद घोड़े पर सवार चला आता था
सुन्दर राजकुमार भगा ले जाता था
अपनी प्रेमिका हमें नज़र आती उस प्रेमिका में
उन बूढी औरतों की शक्लें जो अपने नाती-पोतों की सुना रही होती
आप-बीती कहानियां मन यादों की जुगाली कर वापस लौट आया सोचने पर मजबूर हूँ,
कि यह जीवन कहानियों और किरदारों का अनकहा इतिहास ही तो है
जहाँ उम्र कोई भी हो हम स्त्रियां मन से हमेशा लड़कियां ही रहती हैं लजाती,
इतराती,
सपने बुनती खुद के चीथड़ों में पैबंद लगाती प्यारी,
हिम्मती,
ज़िंदादिल लड़कियां !!