जब आज तक में ही खुद,खुद के किरदार से मोहब्बत नहीं कर पाई,तो कोई गैर कैस ही करेगा मूझ से मोहब्बत।।।रेखा वशिष्ठ।।
जब आज तक में ही खुद,खुद के किरदार से मोहब्बत नहीं कर पाई,तो कोई गैर कैस ही करेगा मूझ से मोहब्बत।
।।रेखा वशिष्ठ।।