घुमते है ये भंवर, ईर्द गिर्द जो तेरे आकर
डर न ईनसे यूं सहमकर, खोंकले से है ये बंजर !!
खिंचते है ये तुझे जो विचार सारे व्यर्थ् है
जान ले अब ये सच तू, तुझमे ही सामर्थ्य है !!
हौसला अब मन मे भरके, लडने ईनसे काबिल तू हो जा
रास्तोंसे ही झगडके खुद ही अपनी मंजिल तू हो जा !!
तंग करले लाख चाहे, ईनके आगे झुकना ना तू
कुछ समय की रात के लिए राहोंमे रुकना ना तू !!

