उठो समय हो गया जागने का, माना अभी अंधेरा है, पर तुम्हें यहि तो दूर भगाना है, तुम्हें भी तो अपने सपने सजाना है, या फिर युं हि हवा में उड़ाना है।। अब तो भौंर ने भी करवट ले ली,सुरज ने भी अपनी किरणें आसमां पर फैला दी, तुम्हें भी अपने सपने महकाना है या फिर फुलों से ही काम चलाना है।। क्या अब भी बाकी तुम्हें जगाना है, या फिर नींद में ही उड़ना उड़ाना है। पंछी भी तैयार बैठे उड़ने की फिराक में, अब भी तुम हो किस पल के इन्तजार में। सूरज आसमां की और बढ़ता जाएगा, ये वक्त उसी के साथ निकलता जाएगा। दिन ढलने के बाद रात हो जाएगी, जिन्दगी फिर करवट बदल जाएगी। उठो तुम समेट लो अपने सपने अच्छे बुरे हर इम्तिहान के लिए, क्या अब भी बाकी तुम्हें जगाना है। उठो समय हो गया जागने का।।