जाने क्या चलता रहा मन में भगवान के, की मेरी मां बना दी शरीर में इन्सान के
कुछ सुन्दर सी काया जैसे धूप में भी छाया
मंद मंद मुस्कुराहट धीमी सी आहट
कुछ तो अलग या है कुछ मिलावट
बनावट में भगवान के
मां है या जादुगर,करतब दिखाती दिनभर जाने कैसे जान लेती मेरे मन की बात
चाहे भूख प्यास हो या कोई एहसास,सबका समाधान है मेरी मां के पास
कुछ तो खास है चमत्कार में भगवान के,
एक स्त्री मां है या मां ही स्त्री है
मिलती जुलती सूरत प्रेम की मूरत समेटे हुए कई एहसास है
हर पल मन उसका रहता है मेरे आस पास
खुद है कमजोर पर हिम्मत और हौसलों से देती राहत
क्या दें भगवान तुझे बदले में एहसान के
जो मां बना दी शरीर में इन्सान के
