जिंदगी का मंजर अभी अधूरा है,
मौत दूर ही रहना देखना अभी पूरा है
खुशनुमा जिंदगी की तुम खामोशी हो
तुम प्रारंभ हो, फिर भी तुम दोषी हो
जिंदगी से नहीं परहेज हमें, ना कोई नाराजगी
पर फिर भी भाति हमें तुम्हारी सादगी।।
मौतएक नाम बुरा, पर तुम्हारी भी प्रशंशा के शब्द नहीं,
अंत में तुम्हीं साथ निभाती, फिर भी संग नहीं।।
जिंदगी ने लिए इम्तिहान पर इम्तिहान बाकी रहा ना कोई फरमान, पर फिर भी तुम्हारे आते ही हुए हैरान,
तुमसे मिलते ही आजादी मिल जाती, जिंदगी की फिर परिभाषा बदल जाती , एक बार फिर जिंदगी मिल जाती।।
एक बार फिर कहानी दोहराई जाती, एक बार अंत में फिर याद तुम्हारी आती, फिर तुम गले लगाती , फिर एहसास कराती , तुम ही प्रारंभ, तुम ही अंत,
तुम ही जिंदगी , तुम ही मौत।।