
जब मैं मेरी बेटी को सुनाती हूं हमारे किस्से
कौन सा खेल हमारा था कौन सा मैदान हमारे हिस्से,
वो मुझसे पूंछती की मम्मी तुम तो खेलती थी खुले मैदानों में फिर क्यों बंद दरवाजे हैं मेरे हिस्से
मैं खामोश हो विचार करूं मैं क्या जवाब दूं।।
जब मैं खुश हो उसे दिखाती पुराने फोटो जिसमें बस ड्राइवर और क्लीनर कंडक्टर भी थे, सहज ही वह पूंछ उठी मम्मी तुम तो सबके साथ घुली-मिली थी फिर
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