मैं बेरोजगार हूं, हां मैं बेरोजगार हूं तो क्या हुआ मैं भी प्यार करने का हकदार हूं। मेरे भी दिल में धड़कन है , और उसमें तुम्हें पाने की तड़पन है। फिरता हूं मैं गलियों में ताकि मंजिल पा सकुं, लड़ता हुं जमाने से ताकि तुम्हे पा सकु,पर मैं अब भी बेरोजगार हूं। तो क्या हुआ मैं भी प्यार करने का हकदार हूं। वैसे तो मेरा प्यार भी तुम हो और हौसला भी तुम,

मेरा रास्ता भी तुम और मंजिल भी तुम पर फिर भी जमाना कहता है कि , मैं बेरोजगार हूं,

हां मैं बेरोजगार हूं तो क्या हुआ मैं भी प्यार करने का हकदार हूं।।