जिज्ञासाओं के पर बहुत हैं चारों तरफ दिवार बहुत हैं, जिज्ञासाऐं बाहर आने को बेताब है पर सामने सवाल बहुत हैं।। मन के कोने से आति आवाज खड़ेकर देती जवाब बहुत हैं छोटे से शहर की जानकारी कम, पर उठती हुई जिज्ञासाएं बहुत हैं, फैलते हुए पंखों का आसमान कम, पर सूरज तक पहुंचने की जिज्ञासाएं बहुत हैं। कदम बढ़ाने के लिए धरती कम, पर सवाल बहुत हैं, एक छोटे बच्चे की जिज्ञासा के सामने जवाब कम, पर चुप रह जाने के कारण बहुत हैं, प्यार की कोशिशें कम पर जिज्ञासा बहुत हैं