कल रात एक ख्वाब आया, था वो जाना पहचाना, वही पुराना पर तब खुली आंखों से था, अब बंद आंखों से आधी रात आया, बुना वो ख्वाब हमने,पिरोये मोती, सजाए सवांरे आज वही ख्वाब आया झकझोर गया वो मेरे मन को, कुछ भूल गए ये याद आया। जब आंख खुली तो कुछ तो नया था, शायद वो मेरा पुराना सपना था, कुछ पूरे कुछ अधुरे तारो से बंधा हुआ था, नहीं वो अपना वो तो सपना था। ख्वाबो के रास्ते दिल में आया, जब आंख खुली तो सामने कुछ नहीं पाया, कुछ भूल गए ये याद आया, कल रात एक ख्वाब आया।।