दिल आवारा है, क्या करें आदत का मारा है।
इस डगर से उस डगर फिरता बेचारा है,
करता अपनी मनमानी कहलाता नाकारा है,
काम और आराम दोनों ने इसे गवारा है,
क्योंकि दिल आवारा है।।
काम अनेकों सभी के पास इसे तो धड़कन धड़काना है,
उसी के लिए चारों तरफ से दौड़ लगाना है,
कभी गलियां कभी मंजिले है सब तरफ इसका आना जाना है,
क्या करें आदत का मारा दिल आवारा है।।
दिल की तो फितरत ही आवारगी ,फिर क्यों इस से नाराजगी, यह तो अपने ही गीत गुनगुनाता,
अपनी धड़कनों को संभालता,
इसे नहींभार सहन होता, यह तो खुशियां बांटता,
कभी cholesterol कभी BP के नाम से सब इसे डांटते
लगाते बंदिशें, पर क्या करें दिल आवारा है आदत का मारा है।।