
एक बचपन हमने भी देखा था,
क्या वो हम ही थे ?या आंखों का धोखा था।।
कुछ नहीं चाहिए था हमें हमारी इच्छाओं में तो बस मस्तियों का झरोखा था।।
कुछ नहीं पाया था हमने पर खोया भी कुछ नहीं था,
शौक़ तो हमें ज्यादा मिट्टी का ही था,
सोना चांदी क्या है ये तो हमने जाना भी ना था।।
कौन अपना कौन पराया ये तो हमें किसी ने सिखाया ही ना था,
हमें तो बस प्
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