१४अगस्त की रात थी,
आजादी आसपास थी,
सुबह भी बेताब थी देखने को आजाद भारत,
आजादी का रंग लाल था, वीरों ने अपना लहु किया देश के नाम था,
भारत को आजाद भारत बनाने के लिए छोड़ा घर-बार था,
बहुत महंगी थी आजादी जो हमें विरासत में मुफ्त मिली,
मुफ्त मिली आजादी की कीमत पहचानो, अपने ही हाथों से देश के पैरों में बेड़ियां ना डाल देना,
खुद आजाद देश को गुलाम ना बना देना, तिरंगे में छुपे लाल लहु को सफेद ना बना देना,
आजादी का जश्न मनाने में शहीदों को ना भुला देना,
हम भारतवासी देश हमारा भारत इसे परदेश ना बना देना।।