...ऐ मुफलिसी मेरी हर जरूरत का हिसाब कर दिया तूने,ऐ मेरी नाकामी तेरा शुक्रिया कैसे करूं,हर मुसाहिब चेहरे को बेनकाब कर दिया तूने..