Poetry 1 min read 607.5K reads

pehachan


...ऐ मुफलिसी मेरी हर जरूरत का हिसाब कर दिया तूने,ऐ मेरी नाकामी तेरा शुक्रिया कैसे करूं,हर मुसाहिब चेहरे को बेनकाब कर दिया तूने..

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