Poetry 1 min read 626K reads

maut


मैं बच भी जाऊँ तो कहाँ जाऊँगा,जितना भागूँगा उतना तेरे करीब आऊँगा,

ये मैं सोचता हूँ कि मैं तेरी दस्तरस में नहीं,एक दिन खबर भी न होगी कि तेरा हो जाऊँगा.

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