छोटी सी आँखों से
देखी जो दुनिया मैंने
सपनों की, अपनी सी जोड़ी
यादों की कड़ियाँ मैंने
अजीब सी ख़ुशी
खुला सा आस्मां
सच होंगे वो ख़्वाब
जागे से अरमां कहने
थोड़ी हैरानगी रही
मायूस मन हुआ
कुछ और ही देखा जब
दुनिया का चेहरा मैंने
ग़ौर से देखा जब
हर शख़्स परेशां दिखा
ग़म किसका बड़ा है
रहा यही एक मसला रहने
बेफ़िक्र ज़माने से
चलना ज़रूर है
बदलते चेहरों की बुनी
अपनी ही दुनिया मैंने
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- रवि


