शिकवे तुम्हें होंगे मुझसे
वादे किए होंगे खुदसे
लेकिन क्या याद हैं वो
बाटें जो लम्हें तुमसे
चुपके से घर वो आना
खुद को ही भूल जाना
गोद में रख सर अपना
सुनना वो लोरी मुझसे
मौसम की पहली बारिश
जाने की वो गुज़ारिश
पानी में खेलने की
ज़िद फिर से करना मुझसे
रातों को जागना मेरा
उस घर को ताकना मेरा
एक लम्हे की झलक को
सजदे कराना मुझसे
ख़्वाबों की दुनिया बुनना
ख़ुशियों की लहरें सुनना
दुनिया से जूझने को
हौसला वो पाना मुझसे
क्या मेरी ख़ता थी
वो सज़ा जो अता की
इस बेरुख़ी से कैसे
दूर जाओगे मुझसे
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- रवि
