ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया, जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया.
जी रहा था तेरे बिन भी, था ज़िन्दगी में वो सब जिसकी चाह सभी को,
फिर भी ना जाने क्यों तेरे इकरार पे रोना आया.
मोहबब्त के बिना भी ज़िन्दगी यू ओझल सी ना थी, फिर भी ना जाने क्यों उलझ कर ,सुलझने के ख़्वाब से भी रोना आया.
ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया,
जाने क्यों तेरे नाम पे रोना आया।


