कुछ ख्वाहिशें हमारे लिए कुछ ज्यादा ही महंगी थी,और कुछ जेब भी खाली था ,किस्मत को दोष देता या ख्वाहिशों को ,अब खुद को गुनहगार बना मुस्कुराता हूं अपने किस्मत और ख्वाहिशों पे।
कुछ ख्वाहिशें हमारे लिए कुछ ज्यादा ही महंगी थी,और कुछ जेब भी खाली था ,
किस्मत को दोष देता या ख्वाहिशों को ,अब खुद को गुनहगार बना मुस्कुराता हूं अपने किस्मत और ख्वाहिशों पे।