दूर से हम होके खड़े,देखते हैं इस ज़माने को।

हर कोई कोशिश में है,आप ही को आज़माने को।

दर्द आँखों में है और पानी भी है,

लाल आँखों की कोई कहानी भी है।

बस जुबाँ ही नहीं है बताने को, 

दूर से हम होके खड़े,देखते हैं इस ज़माने को।


रो के आना यहाँ तड़प के जाना यहाँ से,

समझ आता ही नही है मुस्कुराना कहाँ पे। 

कोई वजह ही नही मुस्कुराने को, 

दूर से हम होके खड़े,देखते हैं इस ज़माने को।


दिल तो दुखता ही है,मगर रोया नहीं,

आज सालों से मै कभी सोया नहीं। 

मौत आती नहीं है सुलाने को, 

दूर से हम होके खड़े,देखते हैं इस ज़माने को।


- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar


चित्र - इंटरनेट