वो क्या छूटे सब छूट गया,
इस जग से नाता टूट गया।
न पड़े गांठ ऐसे जैसे ओ,
दिल का हर धागा टूट गया।
सपनो से भी अब बैर हुआ,
जब वो सपनो में भी रूठ गया।
उसके बिन ऐसी ग़ुरबत है,
जैसे कोई लुटे हुए को लूट गया।
आँखों में समंदर रख लेते,
पर आँखों का दरिया फुट गया।
लाख संभाले बहने से रोकूं,
बहता पानी सा एकजुट गया।
दिल मचलने से घबराता है,
ऐसा दिल से हर रंगरुट गया।
- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar


