उठाओ कलम तुम कमाल तो लिख दो,

लोंगो के दिल का मलाल तो लिख दो। 


बोल सकते नहीं ऐसी बहुत हैं ख्वाहिशें,

दिलों में दबे हैं जो वो सवाल तो लिख दो। 


सह सकते नहीं ऐसे बहुत हैं सितम, 

खुल के दिल का अपने बवाल तो लिख दो। 


रह सकते नहीं ऐसी बहुत हैं गर्दिशें, 

खुश रहना है तो खुद को जलाल तो लिख दो। 


कह सकते नहीं ऐसी बहुत हैं खामोशियाँ,

कह के खुद से खुद को कव्वाल तो लिख दो। 


बुझ सकते नहीं ऐसे बहुत हैं जलते चराग,

बुझा दे इनको कोई उसे भूचाल तो लिख दो। 


लिख सकते नहीं ऐसा कुछ भी तो नही,

न लिख सको तो अपना ख्याल तो लिख दो। 


रविन्द्र राजदार  /RavindraRajdar