Poetry 1 min read 792.5K reads

उचाइयां


उचाइयां हम भीहांसिल कर लेते,गर बुराइयों सेहमको परहेज नहीं होता।

उचाईयों सेप्यारी हैं नसीहतें माँ बाप की,गर भूलते तोबड़ा इससे फरेब नहीं होता।

— रविन्द्र राजदार
Read more Earn more Learn more