महफ़िल में जब किस्से सुनाएंगे हम,
नाम पूछे तो किसका बताएँगे हम,
भूलना छोड़ना होगी फितरत तेरी ,
तुमको कैसे लगा भूल जायेंगे हम।
गजल में जब तुझे गुनगुनायेंगे हम,
नाम पर तो तेरे आह लाएंगे हम ,
हर नज्म में न भूलेंगे सीरत तेरी,
तुमको कैसे लगा भूल जायेंगे हम।
आसमा में जब नजर उठाएंगे हम,
नाम तेरा तो खुदा को बताएँगे हम,
भूल सकते कभी ना तिजारत तेरी,
तुमको कैसे लगा भूल जायेंगे हम।
किसी मोड़ जब मिल जायेंगे हम,
नाम सीने में अपने दिखाएंगे हम,
भूल कैसे गए तुम हर हसरत मेरी,
तुमको कैसे लगा भूल जायेंगे हम।
-रविन्द्र राजदार
*चित्र - इंटरनेट साभार


