स्वतंत्र रहे जनतंत्र रहे,

ना तंत्र हो मिथ्याचारी का |


रोजी भी रहे रोटी भी रहे ,

ना हो दौर किसी दुश्वारी का |


बेटा भी रहे बेटी भी रहे,

ना हो बद्ध किसी भी कुमारी का |


परिवार रहे सदाचार रहे,

ना हो दौर बृद्धाश्रम जारी का |


तेरी बहन रहे मेरी बहन रहे,

ना हो दौर किसी बलात्कारी का |


अभिमान रहे स्वाभिमान रहे,

ना हो दौर किसी लाचारी का |


स्वधर्म रहे परधर्म रहे,

ना हो धर्म कोई बेबीचारी का


पक्ष रहे बिपक्ष रहे,

ना हो दौर किसी खरीदारी का |


सज्ञान रहे ईमान रहे,

ना हो दौर किसी भ्र्स्टाचारी का |


समाचार रहे अखबार रहे,

ना हो दौर बिकी पत्रकारी का |


अड़ोस रहे पड़ोस रहे,

ना हो दौर किसी गोलीबारी का |


स्वस्थ रहे समृध रहे,

ना हो दौर किसी महामारी का |


जवान रहे किसान रहे ,

ना हो दौर आतंक के जारी का |


- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar