
सिंहासन खाली करेगा कौन,
जब जनता ही बैठी हो मौन।
दुःख सहना भी अपराध ही है,
चुप रहना भी एक व्याध ही है।
देखो सह सह तुम हुए हो गौण।
सिंहासन खाली करेगा कौन,
जब जनता ही बैठी हो मौन।
झूठे वादों में ही बह जाती है,
झंडा तो सबका ही उठाती है।
खाती है रोटी आधा य
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