सिंहासन खाली करेगा कौन, 

जब जनता ही बैठी हो मौन। 


दुःख सहना भी अपराध ही है,

चुप रहना भी एक व्याध ही है। 

देखो सह सह तुम हुए हो गौण।


सिंहासन खाली करेगा कौन, 

जब जनता ही बैठी हो मौन। 


झूठे वादों में ही बह जाती है,

झंडा तो सबका ही उठाती है। 

खाती है रोटी आधा या पौन। 


सिंहासन खाली करेगा कौन, 

जब जनता ही बैठी हो मौन। 


तुम को जननायक चुनना होगा,

उसको जनता का सुनना होगा। 

तुम हो अर्जुन और तुम्ही हो द्रोण। 


सिंहासन खाली करेगा कौन, 

जब जनता ही बैठी हो मौन। 


-रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar


चित्र - इंटरनेट