ऐसा नहीं है के सपने पुरे नहीं होते,

बस इंसान उसे जी नहीं पाता है। 


जब उसे एक पूरा हुआ सपना जीना होता है, 

तब वह दूसरे सपनो के लिए व्य्स्त होता है। 


हाँ ये जरूर है जब तक एक सपना पूरा होता है,

तब तक नया सपना जन्म ले चूका होता है। 


और सपनो के बिना जीवन नहीं हो सकता है, 

तो हम सपने देखना छोड़ भी तो नहीं सकते। 


छोड़ पुरानी बांतो को एक सपना नया सजायेंगे। 

तान चदरिया अपनी हसते गाते जीते जायेंगे।।  


-रविन्द्र राजदार