ख्वाहिशों के हमने मीनार ढहते देखे,

दरिया में हमने लाखो पतवार बहते देखे |


सांसों पे भी खूब पहरा लगा हुआ है, 

बीर खुद को भी खुद ही लाचार कहते देखे |


जो तंय उसकी खातिर त्राहिमाम है, 

एक करके दूसरे अंतिम संस्कार करते देखे |


रोटी की महामारी महामारी में ले जाये, 

रोटी या महामारी इसी सोच में हजार मरते देखे |


दौड़ ज़िन्दगी है या ज़िदगी की दौड,

ज़िन्दगी की दौड़ में सारे ही घुड़सवार मरते देखे |


जो है कहीं खुदा तो दिखा दे ख़ुदायी, 

हम सब ने किताबों तुम्हे बार बार करते देखे |


कौन सी जुगत की कुछ और दिन जी लें, 

ये सोचते हुए हमने हर राजदार मरते देखे |


- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar